Search This Blog

Friday, May 3, 2024

अनुभव: ज्ञान का आधार

कहते हैं की बड़े जब बूढ़े हो जाते हैं तो बच्चों की तरह हो जाते हैं,
एक तरह से ठीक है क्योंकि कभी कभी वो भी बच्चो कैसी ही ज़िद करने लगते है लेकिन बच्चों की ही तरह उन्हें समझाना ये बड़ा मुश्किल है, और हो भी क्यों न, एक बड़ा फर्क है दोनो में समझ का।
समझ और ज्ञान, ज्ञान, अनुभवों का परिणाम होता है। बच्चों के ज्ञान का झोला खाली होता है क्योंकि अनुभव उनके पास नहीं होता। बच्चे वही कहते, करते और समझते हैं जो बड़े उन्हें बताते हैं, उनकी समझ का कैनवास खाली होता है जिसे धैर्य से और समझदारी से भरा जा सकता है, लेकिन बुजुर्गो की बात अलग है वो कितना भी बच्चों जैसा बर्ताव करें, उनके पास अनुभव और ज्ञान दोनों का ही भंडार होता है। उन्हें सिर्फ नई जानकारियां दी जा सकती हैं वो भी तब जब वो स्वयं जानने के लिए इच्छुक हों। इसलिए बुजुर्गों के साथ रहने वाले बच्चों में एक अलग प्रकार की तुलनात्मक समझ विकसित हो जाती है जो अपने आप खेल खेल में हो जाती है।

No comments:

Post a Comment