मनुष्य को भगवान् की सबसे सुन्दर कृति कहा जाता है, क्योंकि वह बुद्धिमान होता है और कर्मों का परिणाम समझता है| अमर तो वह भी होना चाहता है किन्तु जानता है की यह संभव नहीं| शरीर कभी अमर नहीं हो सकता इसलिए ऐसे कर्म करना चाहिए की उसके न होने पर भी उसका नाम अमर हो जाए| लोग और समाज उसे याद रखें| किन्तु यह भी सबके लिए संभव नहीं क्योंकि परिस्तिथियाँ सदैव बदलती रहती हैं और किसी के वश में नही होती।
तो फिर इसका एक और समाधान ढूंढ लिया मनुष्य ने,
" मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा"। प्रत्येक के मन में छिपी हुई इच्छा| हर इंसान चाहता है की उसकी संतान सद्गुणी हो, कर्त्तव्य परायण हो और ऐसे काम करे संसार में उसका नाम हो और साथ में उसके माता-पिता का भी नाम हो, इस प्रकार परोक्ष रूप से ही सही व्यक्ति का नाम तो अमर हो ही जाय ।