तुम्हारा साथ, यूँ इस तरह छूटेगा
सोचा न था
तुम बिन ये जीवन कैसे कटेगा
सोचा न था
आज का दिन, हमारे साथ का दिन
मनाऊं न कैसे, अकेली हूँ इस भीड़ में
ये भुलाउं मै कैसे
वो जगहें जहाँ तुम्हे ढूंढने की आदत थी इन आँखों को
आँखों की इस आदत को, छुड़ाऊं मै कैसे
वादे जो किये नहीं पूरे, शौक जो हुए नहीं पूरे
उन वादों और बातों को
निभाऊं मैं कैसे