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Sunday, May 19, 2024

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इंसान एक मात्र वैसा जीव है इस पृथ्वी पर जो अपने ज्ञान को औरों के साथ बांटना चाहता है, शौक से या मजबूरी से, प्यार से या डांट कर, जरूरत देख कर या दूरंदेशी से, कारण कोई भी हो पर ज्ञान का साझा होना निश्चित है, पर ऐसा क्यों है? क्या अन्य किसी जीव में बुद्धि नहीं? नहीं ऐसा नहीं है, दिमाग तो भगवान ने सभी को दिया है पर दूसरों को सीखने की क्षमता नहीं, जब अन्य जीवों को कुछ सिखाया जाता है तो वे सीखते हैं और उसे आदत बना लेते हैं, पर मनुष्य जब भी कुछ सीखता है तो सबसे पहले दूसरों को बताता है, कभी स्वयं को और पक्का करने के लिए और कभी दूसरों की नजरों में खुद को श्रेष्ठ साबित करने के लिए, और इसी तरह ज्ञान आगे और आगे फैलता जाता और साथ ही उसमें बदलाव भी होते जाते हैं जो समय के अनुसार आवश्यक भी होता है, अंततः ज्ञान परम सत्य नही होता परंतु सत्य को पाने के लिए ज्ञानी होना आवश्यक है।

Saturday, May 11, 2024

अधिकार और कर्तव्य

बड़ों का स्नेह और आशीर्वाद हक है हमारा ,
पर फर्ज़ भी कुछ है, हमें ये याद रहना चाहिये।।
उनके अनुभवों से ज्ञान का जो सार हमने पाया,
अपने आप को उस ज्ञान से बेहतर हमने बनाया।।
जिन्होंने हमारे लक्ष्य को पाना हमे सिखलाया,
जब लड़खड़ाये तो संभाला और फिर उत्साह जगाया,
उन्हें भी स्नेह, सम्मान और समय हम दें, हमें ये 
ध्यान रखना चाहिये।।

हमारी खुशी से जो खुश हों और दुख से दुखी,
बिना कहे जो खोजें रास्ता कि हम हो जाये सुखी,
हमारी मुस्कुराहट के लिए जो नींद अपनी त्याग दे,
रहें हम चिंतामुक्त सदा इस बात का जो ख्याल ले,
उन निस्वार्थ माता पिता जनों का 
हमें सम्मान करना चाहिये ।।

Friday, May 3, 2024

अनुभव: ज्ञान का आधार

कहते हैं की बड़े जब बूढ़े हो जाते हैं तो बच्चों की तरह हो जाते हैं,
एक तरह से ठीक है क्योंकि कभी कभी वो भी बच्चो कैसी ही ज़िद करने लगते है लेकिन बच्चों की ही तरह उन्हें समझाना ये बड़ा मुश्किल है, और हो भी क्यों न, एक बड़ा फर्क है दोनो में समझ का।
समझ और ज्ञान, ज्ञान, अनुभवों का परिणाम होता है। बच्चों के ज्ञान का झोला खाली होता है क्योंकि अनुभव उनके पास नहीं होता। बच्चे वही कहते, करते और समझते हैं जो बड़े उन्हें बताते हैं, उनकी समझ का कैनवास खाली होता है जिसे धैर्य से और समझदारी से भरा जा सकता है, लेकिन बुजुर्गो की बात अलग है वो कितना भी बच्चों जैसा बर्ताव करें, उनके पास अनुभव और ज्ञान दोनों का ही भंडार होता है। उन्हें सिर्फ नई जानकारियां दी जा सकती हैं वो भी तब जब वो स्वयं जानने के लिए इच्छुक हों। इसलिए बुजुर्गों के साथ रहने वाले बच्चों में एक अलग प्रकार की तुलनात्मक समझ विकसित हो जाती है जो अपने आप खेल खेल में हो जाती है।