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Saturday, October 17, 2020

कर्पूर गौरम करुणावतारम Powerful Mantra!! शिव मंत्र पुष्पांजलि! Karpur Go...

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।" जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। मंगलम भगवान शंभू..मंगलम रिषीबध्वजा । मंगलम पार्वती नाथो..मंगलाय तनो हर ।। सर्व मंगल मङ्गल्ये..शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्रंबके गौरी..नारायणी नमोस्तुते ।। शिव मंत्र पुष्पांजलि ।। अथ मंत्र पुष्पांजली ।। ॐ यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्, ते हं नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॐ राजाधिराजाय प्रसह्ये साहिने |नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे, स मे कामान्कामकामाय मह्यम्| कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु, कुबेराय वैश्रवणाय | महाराजाय नम:!! ॐ स्वस्ति साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं, पारमेष्ठ्यं राज्यं माहाराज्यमाधिपत्यमयं समंतपर्यायी! सार्वायुष आंतादापरार्धात्पृथिव्यै समुद्रपर्यंता या एकराळिति, तदप्येष श्लोकोऽभिगीतो मरुत: परिवेष्टारो मरुत्तस्यावसन्गृहे! आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवा: सभासद इति। ॐ विश्व दकचक्षुरुत विश्वतो मुखो विश्वतोबाहुरुत, विश्वतस्पात संबाहू ध्यानधव धिसम्भत त्रैत्याव भूमी जनयंदेव एकः। ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।’ ॐ नाना सुगंध पुष्पांनी यथापादो भवानीच, पुष्पांजलीर्मयादत्तो रुहाण परमेश्वर!! ॐ भूर्भुव: स्व: भगवते श्री सांबसदाशिवाय नमः। ।। मंत्र पुष्पांजली समर्पयामि।।

Tuesday, September 15, 2020

अमरता

कौन है इस सन्सार में जो अमर नहीं होना चहता? मैने कहनियो में पढ़ा है और सुना भी है की राक्षस लोग अमर होने के लिए हमेशा भगवान् की तपस्या किया करते थे| सालों तपस्या करने पर भी वे अपना आचरण नहीं सुधारते थे अपितु तपस्या के फलस्वरूप अमरता का वरदान चाहते थे, जो उन्हें कभी नहीं मिलता था| हाँ मरने से बचने के उपाय अवश्य मिल जाते थे| अपनी मूर्खतावश वरदान पाकर भी दुखी ही रहते थे| 
मनुष्य को भगवान् की सबसे सुन्दर कृति कहा जाता है, क्योंकि वह बुद्धिमान होता है और कर्मों का परिणाम समझता है| अमर तो वह भी होना चाहता है किन्तु जानता है की यह संभव नहीं| शरीर कभी अमर नहीं हो सकता इसलिए ऐसे कर्म करना चाहिए की उसके न होने पर भी उसका नाम अमर हो जाए| लोग और समाज उसे याद रखें| किन्तु यह भी सबके लिए संभव नहीं क्योंकि परिस्तिथियाँ सदैव बदलती रहती हैं और किसी के वश में नही होती।

तो फिर इसका एक और समाधान ढूंढ लिया मनुष्य ने,
" मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा"। प्रत्येक के मन में छिपी हुई इच्छा| हर इंसान चाहता है की उसकी संतान सद्गुणी हो, कर्त्तव्य परायण हो और ऐसे काम करे  संसार में उसका नाम हो और साथ में उसके माता-पिता का भी नाम हो, इस प्रकार परोक्ष रूप से ही सही व्यक्ति का नाम तो अमर हो ही जाय ।

Sunday, May 3, 2020

भविष्य में सुनाई जाने वाली कथा

 एक वर्तमान जो आज हम जी रहे हैं हममें से किसी ने भी कभी भी नहीं सोचा था| समस्याएं तो आती ही रहती हैं और उसका सामना सभी अपने अपने तरीके से परिस्तिथियों के अनुसार करते हैं परन्तु इस बार जो आपदा वैश्विक होगी और उसका निदान भी विश्व स्तर पर सबको मिलकर एक समान तरीके से करना होगा ऐसा किसी नहीं सोचा होगा| इस बार कोई किसी पर दया नहीं दिखा सकता क्योंकि सभी समान दर्द के भागीदार हैं| यह एक उदाहरण है भविष्य के लोगों के लिए की यदि उन्होंने प्रकृति के अन्य प्राणियों के प्रति दया को छोड़कर क्रूरता को अपनाया तो प्रकृति कितना भयानक दंड देती है
तो शुरू करते हैं अपनी कथा:
विज्ञानं में अनुसंधान करते करते और अपनी बुद्धि और लगन प्रयोग करते हुय्र मनुष्य ने बड़ी बड़ी सफलताएं पाई अपने अहंकार को पूरा करते हुए प्रत्येक राष्ट्र स्वयं को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए कुछ न कुछ उपाय करने लगा
इस स्पर्धा में वह प्रकृति का दुरूपयोग करने के साथ साथ अन्य प्राणियों पर अत्याचार करने लगा|
ऐसे में सभी वन्य प्राणी दुखी होकर प्रकृति देवी की आराधना करने लगे | उन्होंने कहा की मनुष्य अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर रहा है| ऐसा कोई वन्य प्राणी नहीं जिसे मनुष्य ने छोड़ा हो |
उनके दुःख देख कर प्रकृति बहुत दुखी हुई उन्होंने कहा की मनुष्य को इतना योग्य इसीलिए बनाया था की वह पृथ्वी की रक्षा कर सके परन्तु वह तो इतना अभिमानी हो गया है कि स्वयं को ही सर्व शक्तिशाली समझने लगा है, इसका परिणाम संपूर्ण विश्व के मनुष्यों को भुगतना होगा , जिन निरीह प्राणियों पर वह अत्याचार कर रहा है वही उसके अभिमान को तोड़ने का  कारण बनेंगे| 
प्रकृति ने एक छोटा सा जीव बनाया जिसे देखा नहीं जा सकता था यह जीव स्थान और समय के अनुसार अपने में बदलाव ला सकता था और कुछ ही दिनों में मनुष्य का जीवन समाप्त कर सकता था
इसका उपचार मनुष्य केवल अपनी योग्यता से ही कर सकता है यही पर्यावण में फैले असंतुलन को संतुलित करने में भी सहायक होगा इसके लिए सभी को मिलकर प्रयत्न करना होगा