Search This Blog

Sunday, May 3, 2020

भविष्य में सुनाई जाने वाली कथा

 एक वर्तमान जो आज हम जी रहे हैं हममें से किसी ने भी कभी भी नहीं सोचा था| समस्याएं तो आती ही रहती हैं और उसका सामना सभी अपने अपने तरीके से परिस्तिथियों के अनुसार करते हैं परन्तु इस बार जो आपदा वैश्विक होगी और उसका निदान भी विश्व स्तर पर सबको मिलकर एक समान तरीके से करना होगा ऐसा किसी नहीं सोचा होगा| इस बार कोई किसी पर दया नहीं दिखा सकता क्योंकि सभी समान दर्द के भागीदार हैं| यह एक उदाहरण है भविष्य के लोगों के लिए की यदि उन्होंने प्रकृति के अन्य प्राणियों के प्रति दया को छोड़कर क्रूरता को अपनाया तो प्रकृति कितना भयानक दंड देती है
तो शुरू करते हैं अपनी कथा:
विज्ञानं में अनुसंधान करते करते और अपनी बुद्धि और लगन प्रयोग करते हुय्र मनुष्य ने बड़ी बड़ी सफलताएं पाई अपने अहंकार को पूरा करते हुए प्रत्येक राष्ट्र स्वयं को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए कुछ न कुछ उपाय करने लगा
इस स्पर्धा में वह प्रकृति का दुरूपयोग करने के साथ साथ अन्य प्राणियों पर अत्याचार करने लगा|
ऐसे में सभी वन्य प्राणी दुखी होकर प्रकृति देवी की आराधना करने लगे | उन्होंने कहा की मनुष्य अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर रहा है| ऐसा कोई वन्य प्राणी नहीं जिसे मनुष्य ने छोड़ा हो |
उनके दुःख देख कर प्रकृति बहुत दुखी हुई उन्होंने कहा की मनुष्य को इतना योग्य इसीलिए बनाया था की वह पृथ्वी की रक्षा कर सके परन्तु वह तो इतना अभिमानी हो गया है कि स्वयं को ही सर्व शक्तिशाली समझने लगा है, इसका परिणाम संपूर्ण विश्व के मनुष्यों को भुगतना होगा , जिन निरीह प्राणियों पर वह अत्याचार कर रहा है वही उसके अभिमान को तोड़ने का  कारण बनेंगे| 
प्रकृति ने एक छोटा सा जीव बनाया जिसे देखा नहीं जा सकता था यह जीव स्थान और समय के अनुसार अपने में बदलाव ला सकता था और कुछ ही दिनों में मनुष्य का जीवन समाप्त कर सकता था
इसका उपचार मनुष्य केवल अपनी योग्यता से ही कर सकता है यही पर्यावण में फैले असंतुलन को संतुलित करने में भी सहायक होगा इसके लिए सभी को मिलकर प्रयत्न करना होगा