कोई क्या है और कैसा है इस सवाल का जवाब बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी ऑनलाइन प्रश्न के नीचे उत्तर लिखने की जगह हो और "सबमिट करें" और "शो करें" यह दोनों बटन दिए हो यदि हम सबमिट करें और गलत जवाब आया तो शो करके सही जवाब ढूंढ ले और उसे सही करते हैं
इसलिए किसी के बारे में कोई भी धारणा बनाना मेरी नजरों में सही नहीं है क्योंकि जो धारणा हम बनाएंगे वो उसे बदल देगा।
अक्सर साथ रहते हुए हम जब किसी के बारे में कोई सोच बनाते हैं, उसका बिल्कुल उलट हमें दूसरों से सुनने में आता है। हमारी दृष्टि और अनुभव से कोई व्यक्ति अच्छा और आदर्शवादी प्रतीत होता है, वहीं उसी व्यक्ति के बारे में और राय भी मिलती है, तो यह निश्चित करना कठिन हो जाता है की विश्वास करना चाहिए या नहीं। अक्सर दूसरा व्यक्ति ही सही लगता है हमारा आंकलन किसी व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में गलत निकले तो अफसोस होता है। ऐसे में मुझे लगता है किसी पर अविश्वास करके उसे दुखी करने से अच्छा किसी पर विश्वास न करें, अजीब है न? कहने का मतलब है ऐसी बात जिससे हमारा, समाज का या देश का कोई सरोकार न हो तो विश्वास और अविश्वास के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए और यदि सच जानना हो तो स्वयं खोज करनी चाहिए न की किसी की बात सुन कर निर्णय ले लेना चाहिए।
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