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Saturday, August 17, 2024

प्रकृति का न्याय

प्रकृति निष्पक्ष है, सभी को समान प्रेम करती है।
जीवित रहने का, और फलने - फूलने का,
सभी को समान मौका देती है,
वो नहीं रोकती किसी को सही या गलत करने से,
परंतु गलत का परिणाम देने से भी नहीं चूकती।
जबकि गलत को सही करने के उपाय भी स्वयं में लिए रहती है,
वो जितनी सौम्य और सरल है, उतनी ही रौद्र भी,
जीवन देती है तो वापस लेने की क्षमता भी रखती है।
इसके पास सहजीवी और परजीवी दोनों के लिए स्थान है

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