योग हरे सब रोग
कहते हैं ये सब लोग
पर साध्य नहीं यह गुरु बिन
ये ज्ञान मिले न गुरु बिन
हम धन्य हुए जो गुरु मिले
यह मार्ग मिला हम स्वस्थ हुए
यह संभव न था गुरु बिन
धन्यवाद गुरु आपको
जो योग सिखाया हमको
गुरु वे हैं जो पक्षपात नहीं करते
गुरु वे हैं जो शिष्य के लिए शिष्य भी बन सकते हैं।
पुस्तक मित्र बन सकती है, पर गुरु नहीं
बिन गुरु शिक्षा का मर्म नहीं।
सब कुछ साध्य है, यदि सिर पर गुरु का हांथ है
No comments:
Post a Comment