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Tuesday, September 15, 2020

अमरता

कौन है इस सन्सार में जो अमर नहीं होना चहता? मैने कहनियो में पढ़ा है और सुना भी है की राक्षस लोग अमर होने के लिए हमेशा भगवान् की तपस्या किया करते थे| सालों तपस्या करने पर भी वे अपना आचरण नहीं सुधारते थे अपितु तपस्या के फलस्वरूप अमरता का वरदान चाहते थे, जो उन्हें कभी नहीं मिलता था| हाँ मरने से बचने के उपाय अवश्य मिल जाते थे| अपनी मूर्खतावश वरदान पाकर भी दुखी ही रहते थे| 
मनुष्य को भगवान् की सबसे सुन्दर कृति कहा जाता है, क्योंकि वह बुद्धिमान होता है और कर्मों का परिणाम समझता है| अमर तो वह भी होना चाहता है किन्तु जानता है की यह संभव नहीं| शरीर कभी अमर नहीं हो सकता इसलिए ऐसे कर्म करना चाहिए की उसके न होने पर भी उसका नाम अमर हो जाए| लोग और समाज उसे याद रखें| किन्तु यह भी सबके लिए संभव नहीं क्योंकि परिस्तिथियाँ सदैव बदलती रहती हैं और किसी के वश में नही होती।

तो फिर इसका एक और समाधान ढूंढ लिया मनुष्य ने,
" मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा"। प्रत्येक के मन में छिपी हुई इच्छा| हर इंसान चाहता है की उसकी संतान सद्गुणी हो, कर्त्तव्य परायण हो और ऐसे काम करे  संसार में उसका नाम हो और साथ में उसके माता-पिता का भी नाम हो, इस प्रकार परोक्ष रूप से ही सही व्यक्ति का नाम तो अमर हो ही जाय ।

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